
निर्दइया बादर
काबर अतेक तरसात हस, तँय निर्दइया बादर रे?
अपन मया के बरसा, बरसा दे तैंहा रे।
ये आगी कस ताव ला, जरत भुइँया ले मिटा दे।
सबो किसान मन के, आसा के दियना जला दे।
ए रे निर्दइया बादर, भुइँया मं हरियाली बगरा दे।
तरस गेंहे जीव-परानी, बुंद-बुंद पानी बर।
अपन मया के बरसा, बरसा दे तैंहा रे।
काबर अतेक तरसात हस, तँय निर्दइया बादर रे?
