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भोरमदेव मंदिर: बेजोड़ शिल्पकला अऊ आस्था के जीवंत काब्य

By Araitutari Editor Published May 14, 2026
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रायपुर. छत्तीसगढ़ के कबीरधाम (कवर्धा) जिला म मैकल परबत के कोरा म बसे, लगभग 1000 बछर जुन्ना भोरमदेव मंदिर अपन बेजोड़ नक्काशी के सेती ‘छत्तीसगढ़ के खजुराहो’ के नांव ले जानल जाथे। छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक अऊ आध्यात्मिक धरोहर के गोठ भोरमदेव मंदिर के बिना अधुरा हे। कबीरधाम जिला के मैकल परबत माला के बीच म बने ये जुन्ना शिव मंदिर ह सिरिपुन आस्था के केंद्र नोहे, बल्कि भारतीय बनावट अऊ कला के एक ठन अनमोल नमूना घलो आय। अपन गजब के नक्काशी अऊ सुग्घरई के सेती एला ‘छत्तीसगढ़ के खजुराहो’ कहे जाथे।

Contents
ऐतिहासिक अऊ बनावट के भव्यतासांस्कृतिक विशेषताभोरमदेव कॉरिडोर: विकास के नवा अधियायघूमेइया बर सुबिधा अऊ रद्दातीर-तखार के देखे लायक जगह

ऐतिहासिक अऊ बनावट के भव्यता

ये मंदिर के निरमाण 7वीं ले 11वीं शताब्दी के बीच फणि नागवंशी राजा मन ह करवाय रहिन। ये मंदिर ‘नागर शैली’ के एक ठन अब्बड़ सुंदर उदाहरण आय। एकर तीन मुख्य भाग—गर्भगृह, अंतराल अऊ मंडप—उस समय के कारीगरी के ऊंचई ला देखाथे। मंदिर के बाहरी दीवाल म देवी-देवता, नाचत अप्सरा, नर्तकी अऊ उस समय के आम जनजीवन के बारीक नक्काशी करे गे हे। पथरा म उकेरे गे ये जीवंत मूरति मनखे के भाव अऊ आध्यात्मिक चेतना के गजब संगम आय।

पथरा ला अब्बड़ कलात्मक ढंग ले तराश के बनाय ये मंदिर भारतीय वास्तुकला के एक ठन जागृत धरोहर कस लगथे। दीवाल म देवी-देवता, अप्सरा, गंधर्व अऊ सांस्कृतिक चिन्ह के सुग्घर नक्काशी हवय। ये मूरति म सुभाबिक हाव-भाव, सुग्घरई अऊ अध्यात्म के मेल देखाय देथे।

सांस्कृतिक विशेषता

भोरमदेव के शिल्पकला म मध्यप्रदेश के खजुराहो अऊ ओडिशा के कोणार्क मंदिर के झलक मिलथे। फेर, इहां के स्थानीय जनजातीय संस्कृति अऊ छत्तीसगढ़ी लोक जीवन के परभाव एला एक अलग पहिचान देथे। मंदिर के दीवाल उस समय के समाज के संगीत, नाच-कूद, पहिरवा-ओढरवा अऊ संस्कृति के आरसी (आइना) आय। ये मूरति सिरिपुन देखे बर नोहे, बल्कि इतिहासकार, पुरातत्वविद अऊ कला प्रेमी बर खोज अऊ पढ़ाई के एक बड़ केंद्र घलो आय।

भोरमदेव कॉरिडोर: विकास के नवा अधियाय

केंद्र सरकार के ‘स्वदेश दर्शन योजना 2.0’ के तहत भोरमदेव ला दुनिया के पर्यटन नक्शा म लाय बर 146 करोड़ रुपिया के लागत ले ‘भोरमदेव कॉरिडोर’ योजना सुरू करे गे हे।

  • उद्देस्य: काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के तर्ज म श्रद्धालु बर आधुनिक सुबिधा के विकास करना।
  • सुबिधा: मंदिर परिसर के सुग्घरई, पार्किंग, बिश्राम घर, चकाचक अंजोर अऊ स्थानीय हस्तशिल्प ला बढ़ावा देना। एकर ले न केवल पर्यटन बाढ़ी, बल्कि इहां के जवान बर रोजगार के नवा मौका घलो पैदा होही।

घूमेइया बर सुबिधा अऊ रद्दा

  • रुके के बेवस्था: छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के ‘बैगा एथनिक रिसॉर्ट’ (सरोधा दादर) एक ठन बढ़िया जगह हे। एकर अलावा कवर्धा म सरकारी बिश्राम गृह अऊ निजी होटल घलो हवय।
  • कइसे पहुंचबो?
    • सड़क ले: कवर्धा ले 18 किमी अऊ रायपुर ले लगभग 130 किमी दूरिहा हे। रायपुर, दुर्ग अऊ बिलासपुर ले बस चलथे।
    • रेल ले: रायपुर अऊ राजनांदगांव सबले पास के स्टेशन आय।
    • हवाई जहाज ले: रायपुर के स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डा सबले तीर म हे।

तीर-तखार के देखे लायक जगह

भोरमदेव मंदिर के निचट म मड़वा महल अऊ छेरका महल हवय, जेकर ले नागवंशी राजा के इतिहास अऊ उस समय के समाज के बारे म जानकारी मिलथे।

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Araitutari Editor May 14, 2026
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