Arai Tutari अरई तुतारीArai Tutari अरई तुतारी
  • समाचार
  • हमर ख़बर
    हमर ख़बरShow More
    सब्बो झन के एक खेवईया, विष्णु भैय्या: महतारी, किसान अउ जुवा मन के संसो करे ले आगे नवा बिहान!
    October 1, 2026
    छत्तीसगढ़ के जनजातीय क्षेत्र मन म आयोग के दौरा: चार जिला के आश्रम-छात्रावास के होवत हावे स्थलीय निरीक्षण
    September 22, 2026
    दहेज के कुरीति म रंगमंच ले प्रहार, ‘मया के मुंदरी’ हा जगाइस सामाजिक चेतना
    September 9, 2026
    सूक्ष्म सिंचाई योजना ले खेती बनिस जादा फायदा के, ड्रिप सिंचाई अपनाके किसान हा बढ़ाइस भाजी-पाला के पैदावार
    August 2, 2026
    डिजिटल नवाचार ले सुशासन ल मिलत हे नवा रद्दा
    July 23, 2026
  • लेख – आलेख
  • पुरखौती / पर्यटन
    पुरखौती / पर्यटनShow More
    छत्तीसगढ़ के पुरातात्विक स्थल म बढ़हीं पर्यटक सुविधा
    October 1, 2026
    चंपारण्य म ₹73.42 करोड़ के महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य स्टैच्यू कॉम्प्लेक्स ल केंद्र के मंजूरी, राष्ट्रीय पर्यटन नक्शा म उभरही छत्तीसगढ़
    September 22, 2026
    रामगढ़ संस्कृति, इतिहास, साहित्य अउ पर्यटन के अद्भुत संगम : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
    June 30, 2026
    भोरमदेव मंदिर: बेजोड़ शिल्पकला अऊ आस्था के जीवंत काब्य
    May 14, 2026
    पथरा में उकेरे इतिहास के जीवंत गाथा: बारसूर के बत्तीसा मंदिर अद्भुत शिल्पकला के पहिचान
    May 7, 2026
  • पुरखा के सुरता
    पुरखा के सुरताShow More
    दाऊ मंदराजी ह नाचा ला दिस अलग पहिचान, लोक संस्कृति म उनखर योगदान हमेशा याद रहिही
    September 24, 2026
    लोकरंग पर्व: भरथरी गाथा ले बंधिस समां
    September 6, 2026
    लोकधुन अउ लोकगाथा मन ले सजही रायपुर के ‘लोकरंग पर्व’
    September 5, 2026
    बिलुप्त होत लोक बाजा मन ला मिलिस नवा जिनगी
    September 3, 2026
    72वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार म ‘राम-नामी’ ला सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री के सम्मान, छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक विरासत ला मिलिस राष्ट्रीय गौरव : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
    July 20, 2026
  • कविता
    कविताShow More
    चंडालपुर अब कहाहि चंदनपुर, उपमुख्यमंत्री राजपत्र लेके पहुंचिन गांव
    September 28, 2026
    कहाँ जाबे रे पंथी (कविता)
    June 28, 2026
    निर्दइया बादर (कविता)
    June 28, 2026
    arai tutari kavya
    पावन माघ महिना हे
    February 8, 2026
    आभार सवैया
    July 21, 2024
  • कहानी
  • पत्रिका
Reading: पथरा में उकेरे इतिहास के जीवंत गाथा: बारसूर के बत्तीसा मंदिर अद्भुत शिल्पकला के पहिचान
Share
Notification Show More
Latest News
सूरजपुर म सड़क सुरच्छा मैराथन, 800 प्रतिभागी मन दिस जागरुकता के संदेस
समाचार
बोड़ला म 1 करोर रूपिया के बिकास ला मिलिस गति, कॉलेज म बढ़हि डिजिटल सुबिधा
समाचार
कवर्धा म राज स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता सुरू, 440 खेलाड़ी दिखाहीं दमखम
समाचार
भबिस्य के जरूरत के अनुरुप बनहि छत्तीसगढ़ के अधोसंरचना मास्टर प्लान: मुख्यमंत्री साय
समाचार
सीएम हेल्पलाइन के सिकायत मन के गंभीरता ले निराकरन करव: मुख्य सचिव
समाचार
Aa
Arai Tutari अरई तुतारीArai Tutari अरई तुतारी
Aa
  • समाचार
  • हमर ख़बर
  • लेख – आलेख
  • पुरखौती / पर्यटन
  • पुरखा के सुरता
  • कविता
  • कहानी
  • पत्रिका
  • समाचार
  • हमर ख़बर
  • लेख – आलेख
  • पुरखौती / पर्यटन
  • पुरखा के सुरता
  • कविता
  • कहानी
  • पत्रिका
Have an existing account? Sign In
  • Complaint
  • Advertise
© 2022 Araitutari Media All Rights Reserved.
Arai Tutari अरई तुतारी > Blog > पुरखा के सुरता > पथरा में उकेरे इतिहास के जीवंत गाथा: बारसूर के बत्तीसा मंदिर अद्भुत शिल्पकला के पहिचान
पुरखा के सुरतापुरखौती / पर्यटन

पथरा में उकेरे इतिहास के जीवंत गाथा: बारसूर के बत्तीसा मंदिर अद्भुत शिल्पकला के पहिचान

By Araitutari Editor Published May 7, 2026
Share
SHARE

रायपुर, छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में बसे बारसूर के बत्तीसा मंदिर ह भारतीय बनावट (स्थापत्य कला), आध्यात्मिक भरोसा अउ जुन्ना इतिहास के एक सुग्घर मेल आय। दंतेवाड़ा जिला के बारसूर सहर में स्थित ए मंदिर ह न केवल एक धार्मिक जगह आय, बल्कि ओ बखत के सुग्घर शिल्प परंपरा अउ वैज्ञानिक निर्माण तकनीक के जीता-जागता परमान घलो आय। कभू नागवंशी राजा के राजधानी रहय वाला बारसूर आज घलो “मंदिर मन के नगरी” के रूप में अपन पहिचान बनाए हुए हे।

32 बड़े पथरा के खम्भा मन ऊपर टिके हे बत्तीसा मंदिर

बत्तीसा मंदिर के निर्माण 11वीं शताब्दी में नागवंशी राजा सोमेश्वर देव के बखत में होय माने जाथे। शिलालेख के मुताबिक एकर निर्माण शक संवत 1130 (लगभग 1209 ईस्वी) में पूरा होइस। ए मंदिर के नाम “बत्तीसा” एखर सेती पड़ीस काबर कि एकर पूरा ढाँचा ह 32 बड़े-बड़े पथरा के खम्भा (स्तंभ) मन ऊपर टिके हे। ए खम्भा ला आठ लाइन में बहुत संतुलित तरीका ले लगाए गे हे, जे ह ओ बखत के वास्तु ज्ञान अउ इंजीनियरिंग के ताकत ला देखाथे।

बिना चूना-गारा के होय हे मंदिर के निर्माण

मंदिर के सबले बड़े खुबी ए हे कि एकर निर्माण में पथरा ला बिना चूना-गारा के जोड़े गे हे। हर खम्भा में देवी-देवता , पौराणिक कहानी अउ सजावट के बारीक नक्काशी करे गे हे, जे ह ओ बखत के कारीगर मन के अद्भुत हुनर ला देखाथे। मंदिर के बनावट चउखुट (चतुर्भुजाकार) हे अउ एमा दो ठन गर्भगृह बनाए गे हे, जहाँ अलग-अलग शिवलिंग बिराजे हें। मान्यता हे कि ए शिवालय में राजा अउ रानी ह अलग-अलग पूजा-अर्चना करत रहिन।

खास तकनीकी तरीका ऊपर टिके हे शिवलिंग

मंदिर के गर्भगृह के बाहिर सजे हुए नंदी बइला के मूरती मनखे मन के ध्यान खींचथे। इहाँ ए घलो बिस्वास हे कि नंदी के कान में अपन मन के बात (मनोकामना) कहे ले ओ ह पूरा होथे। गर्भगृह के भीतर बिराजे शिवलिंग अपन खास बनावट के सेती बहुत रोचक हे। कहे जाथे कि ए शिवलिंग ह एक खास तकनीकी तरीका (यांत्रिक प्रणाली) ऊपर टिके हे, जे ह पानी के बहाव ले बिना कोनो घर्षण अउ बिना आवाज के घूम सकथे। ए ह जुन्ना भारतीय विज्ञान अउ तकनीक के गजब नमूना माने जाथे।

बारसूर के ए मंदिर ह सिरिफ बनावट अउ भरोसा के केंद्र ही नई हे, बल्कि इतिहास के नजर ले घलो बहुत जरूरी हे। शिलालेख ले पता चलथे कि मंदिर के देख-रेख बर ‘केरामरूका’ गाँव ला दान में दिय गे रहिस। अभी ए शिलालेख ह नागपुर के संग्रहालय में सुरक्षित रखे गे हे।

दुनिया के तीसरी सबले बड़े गणेश मूरती ह आय बिसेस आकर्षण

बारसूर में स्थित दूसर प्रसिद्ध मंदिर जइसे मामा-भांजा मंदिर अउ चंद्रादित्य मंदिर के संग मिलके बत्तीसा मंदिर ह बस्तर के दरोहर ला अउ मजबूत बनाथे। इहाँ दुनिया के तीसरी सबले बड़े गणेश मूरती ह बिसेस आकर्षण के केंद्र आय, जे ह सैलानी अउ भक्त ला अपन कोती खींचथे। राज सरकार अउ पुरातत्व विभाग कोती ले ए धरोहर ला सहेजाय बर लगातार कोसिस करे जावत हे।

आज बत्तीसा मंदिर ह छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन जगह में सामिल हे। पथरा में उकेरे गे ए अद्भुत गाथा ह हर आय-जाय वाला मनखे ला हमर पुरखा के गौरव भरे इतिहास के सैर कराथे।

You Might Also Like

भबिस्य के जरूरत के अनुरुप बनहि छत्तीसगढ़ के अधोसंरचना मास्टर प्लान: मुख्यमंत्री साय

सीएम हेल्पलाइन के सिकायत मन के गंभीरता ले निराकरन करव: मुख्य सचिव

राष्ट्रपति के छत्तीसगढ़ प्रवास के तैयारी बर लोकभवन मा बैठक

बस्तर के जैविक वनोपज ला मिलही वैश्विक पहिचान, ‘दण्डक ब्रांड’ ला बढ़ावा

बरसात के पाछू निर्माण काम म आहि तेजी, गुणवत्ता पर रही खास जोर

TAGGED: Arai Tutari, Arai Tutari Chhattisgarhi, Barsoor's Battisa Temple, chhattisgarh, chhattisgarhi
Araitutari Editor May 7, 2026
Share this Article
Facebook Twitter Email Print
Previous Article सुशासन तिहार 2026: सिमड़ा ग्राम पंचायत में श्रमदान करके दीन स्वच्छता के संदेस
Next Article ‘सुशासन तिहार 2026’: देवरीकला सिबिर में उमड़िस मनखे मन के भीड़, आवेदन के होइस तुरते निपटारा
Arai Tutari अरई तुतारीArai Tutari अरई तुतारी

© Araitutari Media All Rights Reserved.

Removed from reading list

Undo
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?