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पथरा में उकेरे इतिहास के जीवंत गाथा: बारसूर के बत्तीसा मंदिर अद्भुत शिल्पकला के पहिचान

By Araitutari Editor Published May 7, 2026
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रायपुर, छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में बसे बारसूर के बत्तीसा मंदिर ह भारतीय बनावट (स्थापत्य कला), आध्यात्मिक भरोसा अउ जुन्ना इतिहास के एक सुग्घर मेल आय। दंतेवाड़ा जिला के बारसूर सहर में स्थित ए मंदिर ह न केवल एक धार्मिक जगह आय, बल्कि ओ बखत के सुग्घर शिल्प परंपरा अउ वैज्ञानिक निर्माण तकनीक के जीता-जागता परमान घलो आय। कभू नागवंशी राजा के राजधानी रहय वाला बारसूर आज घलो “मंदिर मन के नगरी” के रूप में अपन पहिचान बनाए हुए हे।

32 बड़े पथरा के खम्भा मन ऊपर टिके हे बत्तीसा मंदिर

बत्तीसा मंदिर के निर्माण 11वीं शताब्दी में नागवंशी राजा सोमेश्वर देव के बखत में होय माने जाथे। शिलालेख के मुताबिक एकर निर्माण शक संवत 1130 (लगभग 1209 ईस्वी) में पूरा होइस। ए मंदिर के नाम “बत्तीसा” एखर सेती पड़ीस काबर कि एकर पूरा ढाँचा ह 32 बड़े-बड़े पथरा के खम्भा (स्तंभ) मन ऊपर टिके हे। ए खम्भा ला आठ लाइन में बहुत संतुलित तरीका ले लगाए गे हे, जे ह ओ बखत के वास्तु ज्ञान अउ इंजीनियरिंग के ताकत ला देखाथे।

बिना चूना-गारा के होय हे मंदिर के निर्माण

मंदिर के सबले बड़े खुबी ए हे कि एकर निर्माण में पथरा ला बिना चूना-गारा के जोड़े गे हे। हर खम्भा में देवी-देवता , पौराणिक कहानी अउ सजावट के बारीक नक्काशी करे गे हे, जे ह ओ बखत के कारीगर मन के अद्भुत हुनर ला देखाथे। मंदिर के बनावट चउखुट (चतुर्भुजाकार) हे अउ एमा दो ठन गर्भगृह बनाए गे हे, जहाँ अलग-अलग शिवलिंग बिराजे हें। मान्यता हे कि ए शिवालय में राजा अउ रानी ह अलग-अलग पूजा-अर्चना करत रहिन।

खास तकनीकी तरीका ऊपर टिके हे शिवलिंग

मंदिर के गर्भगृह के बाहिर सजे हुए नंदी बइला के मूरती मनखे मन के ध्यान खींचथे। इहाँ ए घलो बिस्वास हे कि नंदी के कान में अपन मन के बात (मनोकामना) कहे ले ओ ह पूरा होथे। गर्भगृह के भीतर बिराजे शिवलिंग अपन खास बनावट के सेती बहुत रोचक हे। कहे जाथे कि ए शिवलिंग ह एक खास तकनीकी तरीका (यांत्रिक प्रणाली) ऊपर टिके हे, जे ह पानी के बहाव ले बिना कोनो घर्षण अउ बिना आवाज के घूम सकथे। ए ह जुन्ना भारतीय विज्ञान अउ तकनीक के गजब नमूना माने जाथे।

बारसूर के ए मंदिर ह सिरिफ बनावट अउ भरोसा के केंद्र ही नई हे, बल्कि इतिहास के नजर ले घलो बहुत जरूरी हे। शिलालेख ले पता चलथे कि मंदिर के देख-रेख बर ‘केरामरूका’ गाँव ला दान में दिय गे रहिस। अभी ए शिलालेख ह नागपुर के संग्रहालय में सुरक्षित रखे गे हे।

दुनिया के तीसरी सबले बड़े गणेश मूरती ह आय बिसेस आकर्षण

बारसूर में स्थित दूसर प्रसिद्ध मंदिर जइसे मामा-भांजा मंदिर अउ चंद्रादित्य मंदिर के संग मिलके बत्तीसा मंदिर ह बस्तर के दरोहर ला अउ मजबूत बनाथे। इहाँ दुनिया के तीसरी सबले बड़े गणेश मूरती ह बिसेस आकर्षण के केंद्र आय, जे ह सैलानी अउ भक्त ला अपन कोती खींचथे। राज सरकार अउ पुरातत्व विभाग कोती ले ए धरोहर ला सहेजाय बर लगातार कोसिस करे जावत हे।

आज बत्तीसा मंदिर ह छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन जगह में सामिल हे। पथरा में उकेरे गे ए अद्भुत गाथा ह हर आय-जाय वाला मनखे ला हमर पुरखा के गौरव भरे इतिहास के सैर कराथे।

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Araitutari Editor May 7, 2026
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