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विशेष लेख: छत्तीसगढ़ के जड़ी-बूटी ले महकही नारी शक्ति के स्वावलंबन

By Araitutari Editor Published May 4, 2026
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औषधि पादप बोर्ड के नवा कार्ययोजना ले आत्मनिर्भरता के नवा इतिहास लिखत हें गाँव के महिला

• धनंजय राठौर, संयुक्त संचालक

• अशोक कुमार चंद्रवंशी, सहायक जनसंपर्क अधिकारी

रायपुर. छत्तीसगढ़ के वनांचल के कोरा मा लुकाय अमूल्य औषधि संपदा अब सिरिफ़ स्वास्थ्य के अधार नइ हे, बल्कि प्रदेश के नारी शक्ति के आर्थिक स्वावलंबन के नवा अध्याय बनत हे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के अगुवई मा राज्य सरकार सुशासन के जे सपना ला साकार करत हे, ओला वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप अउ छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम के मार्गदर्शन मा भुइँया मा उतारे जात हे। गिलोय, कालमेघ, बहेड़ा, सफेद मूसली, जंगली हरदी, गुड़मार, अश्वगंधा, अउ शतावरी जइसन जरूरी जड़ी-बूटी ले अर्क अउ उत्पाद तैयार करे जात हें।

पुरखा ज्ञान ला वैज्ञानिक पहचान

वनांचल मा बगरै पुरखा ज्ञान ला सिरिफ़ सुरता झन रहि जाय, ये संकल्प के संग बोर्ड ह ओला वैज्ञानिक तरीका ले जोड़े के फैसला करे हे। एखर तहत ओ स्थानीय बैद अउ जानकार के चिन्हारी सुरु करे गे हे, जे मन करा असाध्य बीमारी के इलाज के गजब ज्ञान हे। बोर्ड के कोसिस हे कि ये महिला मन ला एक बने मंच दिये जाय, ताकि ओमन के अनुभव के लाभ समाज ला मिलय अउ ओमन खुद आर्थिक रूप ले मजबूत बन सकें। ये ह सिरिफ़ एक प्रशासनिक काम नइ हे, बल्कि ओ विरासत के सम्मान आय जेला गाँव के महिला मन ह कतको जुग ले सहेज के रखे हें। छत्तीसगढ़ मा पारंपरिक जड़ी-बूटी अउ जनजातीय ज्ञान ला अब आधुनिक विज्ञान के माध्यम ले नवा पहचान मिलत हे। राज्य के जंगल मा लुकाय औषधि के खजाना ला वैज्ञानिक आधार मा प्रमाणित करके, ओला आजीविका के साधन के रूप मा बढ़ाए जात हे।

संग्रहण ले प्रसंस्करण तक – उद्यमिता के नवा उड़ान

आर्थिक क्षेत्र मा सबले बड़ बदलाव तब दिखत हे, जब जड़ी-बूटी बटोरइया महिला मन अब सिरिफ़ बटोरइया (संग्राहक) झन रहि के निर्माता के भूमिका मा दिखत हें। बोर्ड के रद्दा देखाय के मुताबिक, महिला स्व-सहायता समूह मन ला औषधि प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) के बढ़िया तरीका सिखाय जात हे। ये पहल ह न केवल जड़ी-बूटी मन ला बचावत हे, बल्कि वनवासी अउ लघु वनोपज बटोरइया के आय ला बढ़ा के ओमन ला आत्मनिर्भर बनावत हे। छत्तीसगढ़ मा 1500 ले जादा सक्रिय बैद के ज्ञान ला सहेजे अउ जड़ी-बूटी मन के बाजार (विपणन) बर छत्तीसगढ़ जनजातीय स्थानीय स्वास्थ्य परंपराएं और औषधीय पादप बोर्ड ह डट के काम करत हे। ये संस्था ह हर्बल उत्पाद मन के खेती, ओखर कीमत बढ़ाय (मूल्य संवर्धन), अउ मार्केटिंग मा तकनीकी मदद अउ सामुदायिक भागीदारी तय करथे।

मूल्य संवर्धन (वेल्यू एडिशन) छत्तीसगढ़ मा जड़ी-बूटी के ‘मूल्य संवर्धन’ एक बड़े पहल आय, जेकर माध्यम ले राज्य के बढ़िया वन संसाधन ला वैज्ञानिक तरीका ले प्रोसेस (संसाधित) करके ओकर आर्थिक कीमत ला बढ़ाय जात हे। राज्य सरकार ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ ब्रांड के तहत ये उत्पाद ला बढ़ावा देवत हे। जब ये महिला मन जंगल ले मिले कच्चा माल ला साफ करथें, सुखाथें अउ ओला चूर्ण, अर्क या तेल के रूप मा बदलथें, त ओकर कीमत अउ गुन (गुणवत्ता) ह कतको गुना बढ़ जाथे। ये मूल्य संवर्धन के सीधा आर्थिक फायदा ओमन के बैंक खाता मा पहुँचत हे, जेकर ले बिचौलिया के राज ह पूरी तरह ले सिराय गे हे। गिलोय, कालमेघ, बहेड़ा, सफेद मूसली, जंगली हरदी, गुड़मार, अश्वगंधा अउ शतावरी जइसन जरूरी औषधि ले अर्क अउ उत्पाद तैयार करे जात हें। 65 ले जादा लघु वनोपज ला न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) मा बिसा के ओखर प्रोसेसिंग करे जात हे। ये पहल छत्तीसगढ़ ला एक बड़े ‘हर्बल स्टेट’ के रूप मा खड़ा करे बर एक बड़का कदम आय, जेमा पुरखा परंपरा अउ आधुनिक तकनीक के मेल हे।

छत्तीसगढ़ हर्बल्स ला दुनिया भर मा पहचान छत्तीसगढ़, जेला ‘जड़ी-बूटी गढ़’ घलो कहे जाथे, अपन घना जंगल मन, खास करके बस्तर मा 160 ले जादा किसम के दुरलभ जड़ी-बूटी के प्राकृतिक खजाना हे। यहाँ के माटी मा अश्वगंधा, सर्पगंधा, गोक्षुरा (गोखरू), कुटकी अउ तिखुर जइसन औषधि मिलथें, जे मन स्वास्थ्य अउ ताकत बर जानबा हें। बाजार के चुनौती ला मौका मा बदलत हुए बोर्ड ह मार्केटिंग (विपणन) के तरीका ला साफ-सुथरा बना दे हे। प्रदेश के ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ ब्रांड ला मजबूत करे बर प्रदर्शनी अउ रिटेल आउटलेट के माध्यम ले ये उत्पाद ला सीधा सहर के ग्राहक तक पहुँचाय जात हे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ अउ मुख्यमंत्री के ‘लखपति दीदी’ अभियान ला सफल बनाय मा ये रणनीति ह संजीवनी कस काम करत हे।

नर्सरी प्रबंधन अउ स्थानीय रोजगार जड़ी-बूटी मन ला किचिन गार्डन, होम गार्डन मा खिड़की, बालकनी, टेरिस ऊपर गमला मा या कोनो घलो बर्तन मा कभू घलो उगाय जा सकथे। कंटेनर गार्डनिंग या ग्रो बैग मा जड़ी-बूटी उगाय के एक फायदा ये घलो हे कि जड़ी-बूटी ला ओकर जरूरत के हिसाब ले माटी, खाद, घाम अउ नमी ला कम-जादा करे जा सकथे। पर्यावरण ला बचाय अउ कमाई के बीच तालमेल बनाय बर औषधि वाले पौधा मन के ‘मदर नर्सरी’ तैयार करे के जिम्मेदारी महिला समूह ला सोंपे जात हे। एखर ले दुरलभ जड़ी-बूटी के जात (प्रजाति) ला मेटा जाय ले बचाय जात हे। स्थानीय स्तर मा महिला मन बर बछर भर के रोजगार के रद्दा खुल गे हे, जेकर ले गाँव-जंगल ले होय वाला पलायन मा घलो रोक लगे हे।

समृद्ध नारी, सशक्त छत्तीसगढ़ राज्य सरकार के ये सोच ह ए बात के प्रमाण आय कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मंशा के मुताबिक छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड ह सिरिफ़ एक अधिकारी कस नइ, बल्कि एक रद्दा देखइया (मार्गदर्शक) के रूप मा काम करत हे। सब झन ला संग लेके चले अउ संस्था मा सुधार करे ले आज छत्तीसगढ़ के बेटी मन आत्मनिर्भर बनत हें। वनांचल के महिला मन के चेहरा मा दिखत हाँसी ह एक समृद्ध अउ स्वावलंबी छत्तीसगढ़ के असली तस्वीर आय।

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Araitutari Editor May 4, 2026
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