गौमाता अउ कृषि औजार मन के पूजा-अर्चना करके नीक फसल अउ सुख-समृद्धि के करिन कामना
रायपुर, उप मुख्यमंत्री अरुण साव हा आज छत्तीसगढ़ के पहिली तिहार हरेली ला पारंपरिक रीत-रिवाज ले पूजा-पाठ करके मनाइन। ओमन नवा रायपुर स्थित अपन शासकीय आवास मा गौमाता अउ कृषि औजार मन—नांगर, गैंती, कुदारी अउ दूसर औजार मन के विधि-विधान ले पूजा-अर्चना करिन। घर के दुआर (प्रवेश द्वार) मा निरोगी रहे अउ हरियाली के प्रतीक नीम के डांवा (डाली) लगाइन। ओमन हरेली के ए सुभ मौका मा भगवान ले प्रदेश मा नीक पानी-गीरई (बरसात), सुख-समृद्धि अउ खेत-खार मा लहलहावत फसल बर गोहार लगाइन।
मुख्य बातें अउ संदेश
1. गौमाता अउ कृषि औजार मन के पूजा
- उप मुख्यमंत्री हा अपन शासकीय आवास मा नांगर, गैंती, कुदारी जइसन खेती-किसानी मा काम आवे वाला औजार मन के पूजा-अर्चना करिन।
- गौमाता के सेवा अउ पूजा करके प्रदेश के सुख-समृद्धि के कामना करिन।
2. नीम के डांवा अउ परंपरा के पालन
- आरोग्य अउ हरियाली के प्रतीक के रूप मा घर के मुख्य दुआर मा नीम के डांवा लगाइन, जेहा हरेली के पारंपरिक लोक परंपरा ए।
उप मुख्यमंत्री के संदेश
“हरेली हमर माटी अउ लोक संस्कृति ले जुड़े परब ए”
— अरुण साव (उप मुख्यमंत्री)
“हरेली छत्तीसगढ़ के माटी, खेती-किसानी अउ लोक संस्कृति ले जुड़े परब ए। एमा गेड़ी संग छत्तीसगढ़ के समृद्ध लोक परंपरा मन के झलक देखे बर मिलथे। हरेली हमर संस्कृति अउ ग्रामीण जीवन के आत्मीयता ला देखाथे। ए तिहार हा प्रकृति अउ अन्नदाता बर सम्मान के भाव घलो प्रकट करथे। हमर लोक परंपरा अउ तिहार हमर सांस्कृतिक पहचान हवयं, अउ एकर संरक्षण अउ संवर्धन हमर जम्मो मन के जिम्मेदारी ए।”
