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Arai Tutari अरई तुतारी > Blog > Uncategorized > जिंदगी नवा अंजोर कोति: बंदूक के गूंज वाला लाल गलियारा अब खामोश
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जिंदगी नवा अंजोर कोति: बंदूक के गूंज वाला लाल गलियारा अब खामोश

By Araitutari Editor Published March 23, 2026
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खास बात

  • दशक भर ले माओवादी हिंसा के सेती बस्तर मा संघर्ष जारी रहिस।
  • सुरक्षा बल के पोठ रणनीति ले माओवादी मन के कमर टूट गे हे।
  • बस्तर अब डर ले मुक्त हो के सांति अउ विकास के रद्दा मा रेंगत हे।

जंगल ले जुड़ाव अउ तनाव के बीज

बस्तर के गोंड, हल्बा अउ माड़िया जनजाति बर जंगल सिरिफ एक संसाधन नोहे, भलकुन उंखर जिनगी अउ सुरक्षा के प्रतीक आय। पर ये रिस्ता मा पहिली दरार तब आइस जब अंग्रेज मन ह ‘इंडियन फारेस्ट एक्ट’ लागू करके आदिवासी मन के हक ला छीन लीन। एखर विरोध मा 1910 मा ‘भूमकाल विद्रोह’ होइस, जेमा गुंडाधूर अउ डेबरीधूर जइसन जननायक मन आगू आइन। आजादी के बाद घलो स्थिति नई बदलिस अउ 1966 मा राजा प्रवीरचंद्र भंजदेव के मऊत ह एक बड़े खालीपन पैदा कर द़िस।

Contents
खास बातजंगल ले जुड़ाव अउ तनाव के बीजतेलंगाना ले छत्तीसगढ़ तक माओवाद के रेंगईहिंसा के चरम दौर: सलवा जुडूम ले झीरम तकटेकुलगुड़ेम ले अंत के कहानीनवा बिहनिया कोति बस्तर

तेलंगाना ले छत्तीसगढ़ तक माओवाद के रेंगई

1967 मा पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी ले उठे अवाज ह धीरे-धीरे माओवादी विचारधारा बन गे। 1980 के दशक मा कोंडापल्ली सीतारमैया (केएस) ह बस्तर के घने जंगल अउ पहुंच ले दूर इलाका मन ला अपन गढ़ बनाइस। ‘जल-जंगल-जमीन’ के नारा दे के माओवादी मन ह सीधा-साधा आदिवासी मन के हाथ मा बंदूक थमा दीन। देखते-देखत बस्तर मा ‘जनताना सरकार’ के नाव मा एक समानांतर सत्ता चले लगिस, जेहा बाद मा सिरिफ डर अउ आतंक के खेल बन के रह गे।

हिंसा के चरम दौर: सलवा जुडूम ले झीरम तक

साल 2004 मा माओवादी संगठन मन के मेल होय के बाद हिंसा अउ बाढ़ गे। रानीबोदली (2007), ताड़मेटला (2010) अउ झीरम घाटी (2013) जइसन खौफनाक हमला मन बस्तर ला जम्मो दुनिया मा चर्चा मा ला दीस। स्कूल, सड़क अउ पंचायत भवन मन ला तोड़े गिस, जेकर ले आदिवासी समाज विकास ले कट गे। 2005 मा शुरू होय ‘सलवा जुडूम’ ह समाज ला दू भाग मा बांट दीस, जेकर ले हजारों लोगन विस्थापित हो गे अउ कतको गांव खाली हो गे।

टेकुलगुड़ेम ले अंत के कहानी

माओवादी तंत्र अब भीतर ले कमजोर होय लगिस हे। सुरक्षा बल मन के नवा कैंप, आधुनिक तकनीक अउ सटीक रणनीति ह माओवादी नेतृत्व ला हिला के रख दीस। बसव राजू अउ हिड़मा जइसन बड़े चेहरा मन के मारे जाय अउ भूपति, देवजी जइसन लगभग 2700 माओवादी मन के आत्मसमर्पण (Surrender) ह ये साबित कर दीस कि अब बंदूक के दिन लद गे हें।

नवा बिहनिया कोति बस्तर

सबले बड़े बदलाव सितंबर 2025 मा आइस, जब वरिष्ठ माओवादी भूपति ह स्वीकार करिस कि ‘सशस्त्र संघर्ष’ ओकर मन के सबले बड़े गलती रहिस। आज बस्तर के जंगल मा सांति लहुटत हे। बंदूक के गूंज अब कम हो गे हे अउ लोगन मन मा विकास के आस जगे हे। छह दशक ले जलत आगी अब राख होवत हे अउ हमर बस्तर एक नवा बिहनिया कोति आगू बढ़त हे।

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Araitutari Editor March 23, 2026
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