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पुरखौती / पर्यटन

सुघ्घर हे हमर पुरखौती, देस-बिदेस के पर्यटन मानचित्र म जेखर हे दबदबा… अईसन हे हमर सिरपुर के इतिहास

By Araitutari Editor Published April 21, 2023
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History of Sirpur
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ईंटा ले बने प्राचीन लक्ष्मण मंदिर हाबे पुरखौती वास्तुकला के मिसाल
खोदाई म मिले हे कई बछर प्राचीन बौद्ध मठ
सिरपुर महोत्सव ले होवत हे जग भर म नाव
दिखत हे कला अऊ संस्कृति के अद्भुत झलक

मनोज सिंह, सहायक संचालक, जनसंपर्क

सिरपुर छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिला म महानदी के घाट तिरन एक ठन हमर पुरखौती जगा हावय। एखर नाव हमर पुरखा मन ह श्रीपुर धरे रिहिन, जेन ह तब के जमाना म बड़का नगर रिहिस। तउन बेरा म ऐला दक्षिण कोशल के राजधानी केहे जात रिहिस। सोमवंशी राजा हर इहां राम मंदिर और लक्ष्मण मंदिर बनवाय रिहिन। ईंटा ले बने पुराना लक्ष्मण मंदिर आजो दर्शनीय हरय। खोदे म इहां पुराना बुद्ध के मठ घलो मिले हावय।

देस के संग बिदेसी पर्यटक मन बर सिरपुर ह अपन ऐतिहासिक अउ पुरातात्विक महत्व के सेति आजो आकर्षण के केंद्र हावय। ए हर पांचवी ले आठवीं शताब्दी के बीच म दक्षिण कोसल के राजधानी रिहिस। सिरपुर म सांस्कृतिक अउ वास्तुकौशल कला के बड़ सुन्दर संग्रह हावय। भारतीय इतिहास सिरपुर अपन धार्मिक मान्यता अउ वैज्ञानिक दृष्टिकोण बर पहिचाने जात रिहिस, तेने ह ओखर आकर्षण के केन्द्र रिहिस। वर्तमान म घलो देस—विदेश के पर्यटक मन बर सिरपुर ह आकर्षण के केंद्र हरय।

सिरपुर महोत्सव के आयोजन

सिरपुर के एतेहासिक महत्व ल देख के छत्तीसगढ़ सरकार ह हर बछर इहां सिरपुर महोत्सव के आयोजन करथे। छत्तीसगढ़ के विश्व प्रसिद्ध एतिहासिक जगा सिरपुर म माघी पूर्णिमा के बेरा म तीन दिन तक सिरपुर महोत्सव के आयोजन करे जाथे, जेखर लोगन मन अगोरा रहिथे।

बुद्ध के बिरासत संग लोककला अउ संस्कृति के केंद्र 

सिरपुर महोत्सव आधुनिकता के दउर म अपन पुरखा मन के संस्कृति ल बनाके रखे हावय। हमर आज के पीढ़ी ल इहां बुद्ध के बिरासत के संग म अपन लोककला अउ संस्कृति ल जाने के मउका मिलथे। सिरपुर ह देखे अउ निहारे के संग म आस्था अउ श्रद्धा के घलोक केन्द्र हरय। जेन ल देखे अउ जाने बर देस अउ बिदेस ले मनखे मन इहां आथे।

गंधेश्वर महादेव के मंदिर

सिरपुर म गंधेश्वर महादेव के घलोक मंदिर हावय। जेन ह महानदी घाट तिरन हे। एखर दूनो स्तंभ म ओखर संबंध म लिखाय हावय। केहे जाथे कि चिमणाजी भोसले ह ये मन्दिर के मरम्मत कराय रिहिन। सिरपुर म बौद्धकाल के कई ठन मूर्ति घलोक मिले हे। एमा तारा के जेन मूर्ति मिले हावय, तेन ह बड़ सुघ्घत हावय। केहे जाथे कि 310 ई. म अलाउद्दीन खिलजी के सेनापति मलिक काफूर हर वारंगल जात समय सिरपुर ऊपर घलोक हमला करे रिहिस, जेखर कथा अमीर खुसरो ह लिखे रिहिन। इतिहास के जानकार मन के मानबे त गंधेश्‍वर मंदिर म शिविलंग लगभग 2 हजार साल पुराना हरे अऊ एखर सबले खास बात ए हे कि शिवलिंग ले तुलसी पत्ता के खुसबू आथे। एक अऊ खास बात हे काबर कि गंधेश्‍वर शिवलिंग द्वादश ज्योतिर्लिंग वाला पथरा ले बने हे।

का कहिथे इतिहास के पन्ना

ये मंदिर ल सोमवंशी राजा हर्षगुप्त के विधवा रानी बासटा देवी ह बनवाय रिहिस। अलंकरन, सुंदरता, अउ निरमान के मामला म एखर कोनो मुकाबला नइये। 7 फुट ऊंच पथरा के नेह ऊपर ये मंदिर ल बनवइया रानी बासटा ह महाशिव गुप्त बालार्जुन के मां अउ मगध के राजा सूर्यबर्मन के बेटी रिहिस। एतिहासिक नगर सिरपुर म बड़का तरिया अउ पाण्डु वंशज मन के काल म बड़का-बड़का मंदिर के निरमान होय रिहिस। जेमा त्रिदेव मंदिर ह परमुख हे। एखर दुवारी ह दस फुट चौड़ा रिहिस। इही दउर म सुरंग टीला, पंचायतन मंदिर, गंधेश्वर मंदिर के सोज म बड़का शिव मंदिर के घलो निरमान होय रिहिस। सिरपुर म गंधेश्वर मंदिर ह महानदी के पावन तट तिरन हावय। जिहां हर बछर लाखों श्रद्धालु मन सावन म रेंगत बम्महनी (महासमुंद) सेतगंगा ले कांवर यात्रा करत ‘बोल बम’ के जयकारा लगावत सिरपुर आथे अउ  भगवान गंधेश्वर ल जल अर्पित करथे।

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TAGGED: chhattisgarh, Chhattisgarh Tourism, History of Sirpur, Sirpur, सिरपुर का इतिहास
Araitutari Editor April 21, 2023
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