रायपुर। छत्तीसगढ़ के 26वां राज्य स्थापना दिवस के अवसर म नवा रायपुर म आयोजित राज्योत्सव म वन अउ जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रदर्शनी ह लोगन मन के आकर्षण के केंद्र बने हावय। प्रदर्शनी के माध्यम ले वन संरक्षण, वन्यजीव मन के सुरक्षा, आदिवासी संस्कृति, ग्रामीण आजीविका अउ आत्मनिर्भरता के अलग-अलग पहल ल प्रदर्शित करे जात हावय। इहाँ पौधरोपण अभियान ले लेके बांस शिल्प, वनोपज अउ हर्बल उत्पाद तक के माध्यम ले प्रदेश के समृद्ध वन संपदा अउ ग्रामीण अर्थव्यवस्था के तसवीर देखे बर मिलत हावय।
प्रदर्शनी के मुख्य द्वार ल इंद्रावती टाइगर रिजर्व, बीजापुर के प्रसिद्ध चेंदरू द्वार के तर्ज म तैयार करे गीस हावय। एमा बस्तर के आदिवासी युवक चेंदरू अउ बाघ के दोस्ती ल बजाये गीस हावय, जौन मानव अउ वन्यजीव मन के बीच सह-अस्तित्व के संदेश देथे। उहें ‘संवरता छत्तीसगढ़’ थीम के तहत ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के उपलब्धि मन ल घलो प्रदर्शित करे गीस हावय। विभाग के अनुसार बछर 2024 म लक्ष्य ले 140 प्रतिशत ज्यादा 3.50 करोड़ अउ बछर 2025 म लक्ष्य ले 215 प्रतिशत ज्यादा 3.55 करोड़ बिरवा रोपे गीस। किसान वृक्ष मित्र योजना के तहत 36,896 किसान मन अपन 62,441 एकड़ निजी जमीन म 3.67 करोड़ बिरवा लगाइन। एखर ले पर्यावरण संरक्षण के संग किसान मन बर अतिरिक्त कमाई के अवसर घलो तैयार होइन।
प्रदर्शनी म ‘बदलता बस्तर’ पैनल के रद्दा ले बस्तर इलाका म होवत बदलाव अउ आजीविका बढ़ाए के कोसिस मन ल बजाये गीस हावय। एखर तहत 572 देवगुड़ी के निर्माण अउ जीर्णोद्धार करे गीस हावय। मनरेगा के माध्यम ले 21.67 लाख मानव दिवस के रोजगार सृजित होइस। वनोपज संग्रहण ले ग्रामीण मन ल आर्थिक फायदा मिलत हावय, उहें कांकेर इलाका म पर्यटन ल बढ़ावा दे बर 35 जिप्सी के संचालन करे जात हावय, जेकर ले लगभग 200 स्थानीय युवा मन ल रोजगार मिल हावय। ये पहल वन संरक्षण के संग स्थानीय समुदाय मन के आर्थिक भागीदारी ल घलो प्रदर्शित करथें।
संयुक्त वन प्रबंधन अउ रोजगार स्टॉल म बांस ले तैयार घर, नाव, मछली, लालटेन, मंदिर, फूलदान अउ अलग-अलग सजावटी वस्तु मन प्रदर्शित करे गीस हावय। ये कलाकृति मन के माध्यम ले ग्रामीण कारीगर मन के पारंपरिक कला अउ हुनर ल आगू लाएंगे हावय। उहें वन धन केंद्र मन म तैयार महुआ, शहद, आंवला अउ दूसर वनोपज आधारित उत्पाद घलो बिक्री बर उपलब्ध हावय। औषधीय पादप बोर्ड के ‘घर के बाड़ी म औषधीय पौधा के रोपण’ योजना के तहत ग्रामीण महिला मन ल कमाई के अवसर मन ले जोड़े के जानकारी दे जात हावय। विभाग के अनुसार सिंगी अउ सतावर कस औषधीय पौधा मन के खेती ले महिला मन बछर भर म 20 ले 30 हजार रुपिया तक के कमाई कर सकत हें। धमतरी जिला के 27 गांव मन म पायलट प्रोजेक्ट के तहत 1.21 लाख बिरवा लगाए गीस हावय।
प्रदर्शनी के छत्तीसगढ़ हर्बल्स स्टॉल म सफेद मूसली चूर्ण, त्रिफला चूर्ण, आंवलकी चूर्ण, एलोवेरा शैम्पू, महाभृंगराज तेल अउ एलोवेरा साबुन कस उत्पाद लोगन मन के रुचि के केंद्र बने हावय। एखर छोड़ के कांगेर घाटी, तीरथगढ़ जलप्रपात अउ ग्रामीण तालाब के आकर्षक मॉडल घलो प्रदर्शित करे गीस हावय, जौन प्रदेश के प्राकृतिक सुंदरता अउ पर्यावरण संरक्षण के संदेश देथें।
प्रदर्शनी के अवलोकन करे बर पहुंचे गांव मरोद के त्रिवेंद्र साहू अउ रवि निर्मलकर ह कहिन कि वन विभाग के प्रदर्शनी देख के अइसन लागिस, मानों पूरा छत्तीसगढ़ के जंगल अउ उनकर विशेषता मन एकच ठउर म देखे बर मिलत होवय। उमन बांस के कलाकृति, औषधीय पौधा के जानकारी अउ हर्बल उत्पाद मन के सराहना करत कहिन कि जंगल मन के संरक्षण के संग ग्रामीण मन ल रोजगार अउ आत्मनिर्भरता ले जोड़े के पहल सराहनीय ए। राज्योत्सव म वन विभाग के ये प्रदर्शनी प्राकृतिक विरासत, पर्यावरण संरक्षण अउ ग्रामीण अर्थव्यवस्था के बीच मजबूत रिश्ता ल प्रदर्शित करथै।
