जीवामृत अउ वर्मी कम्पोस्ट के उपयोग ले रसायनिक खाद ऊपर निर्भरता होइस कम, कृषि विभाग के रस्ता दिखाए ले मिलिस नवा दिशा
रायपुर, कृषि विभाग द्वारा जैविक अउ प्राकृतिक खेती ला बढ़ावा देवे बर करे जात प्रयास किसान मन बर बड़ गुनवंती साबित होवत हे। सरगुजा जिला के विकासखंड सीतापुर के ग्राम पेटला के किसान एरिन भगत हा कृषि विभाग के मार्गदर्शन मा जैविक खेती ला अपनाके खेती के खर्चा मा बड़ कमी लाए हे अउ आतमनिर्भर खेती के कोती एक प्रेरणादायी मिसाल पेश करे हे।
कृषि विभाग ले मिले सीख-पढ़ई अउ तकनीकी जानकारी के बाद एरिन भगत हा अपन खेत मा जीवामृत अउ वर्मी कम्पोस्ट के लगातार उपयोग शुरू करिस। विभाग द्वारा ओला जीवामृत तैयार करे बर खास ड्रम दे गिस, जेकर मदद ले ओहा गाय के मूत ले जीवामृत तैयार करथे। उहें, गाय के छेना-गोबर ले वर्मी कम्पोस्ट बनाके खेत मा उपयोग करत हे।
एरिन भगत हा अभी पूरा तरीका ले जैविक खेती करत हे। संग मा ओहा वर्मी कल्चर के माध्यम ले बढ़िया किसम के जैविक खाद के उत्पादन घलो करत हे। एकर ले रसायनिक खाद मन ऊपर ओकर निर्भरता भारी कम हो गे हे, जेकर नतीजा ए होइस कि खेती के खर्चा मा कमी आईस अउ फसल उपजाए के तरीका अउ टिकाऊ बन गे।
ओहा बताइन कि पहिली रसायनिक खाद मन मा जादा पैसा खरचा करे ला परत रिहिस, लेकिन अब कुदरती साधन मन ले बने जैविक खाद के उपयोग ले पैसा के बचत होवत हे। एकर संग-संग भुइयां के उपजाऊ शक्ति घलो बने हे, जेकर ले आने वाला समय मा अउ सुघर फसल होए के आस बाढ़े हे। ओकर मानना हे कि जैविक खेती हा किसान मन के आमदनी बढ़ाए के संग-संग पर्यावरण बचाए मा घलो बड़ भूमिका निभावत हे।
कृषि विभाग हा किसान मन ला जैविक खेती, जीवामृत बनाये, वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन अउ प्राकृतिक खेती के तरीका मन के सीख-पढ़ई देके ओमन ला आतमनिर्भर बनाए बर लगातार काम करत हे। विभाग के वैज्ञानिक मार्गदर्शन अउ तकनीकी सहयोग ले जिला के किसान कम खर्चा, पर्यावरण बर सुघर अउ टिकाऊ खेती कोती तेजी ले आगू बढ़त हवयं।
