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छत्तीसगढ़ी ज्ञान

सफलता के कहानी :परसा फूल ले बढ़त आजीविका अउ खुशहाली

By Araitutari Editor Published April 30, 2026
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रायपुर. परसा के फूल न केवल कुदरती सुंदरता के चिनहा आय, बल्कि गांव के अर्थव्यवस्था, रोजी-रोटी अउ सेहत बर एक बहुते कीमती चीज आय। एकर नारंगी-लाल रंग के फूल ला ‘जंगल के आगी’ घलो कहे जाथे, जेहा बसंत के ऋतु में गांव-देहात में खुशहाली लाथे। परसा के फूल, बीजा अउ गोंद (कमरकस) के उपयोग आयुर्वेद में चर्म के रोग, पेट के कीरा, सुगर (डायबिटीज) अउ कमजोरी ला दूर करे बर करे जाथे। ए जड़ी-बूटी ला बेंच के घलो ग्रामीण मन अपन कमाई बढ़ावत हें।

दवाई अउ संस्कृति के फूल आय परसा

परसा फूल (ब्यूटिया मोनोस्पर्मा), जेला टेसू, ढाक या “जंगल के आगी” घलो कहे जाथे, भारत के एक जरूरी औषधीय अउ सांस्कृतिक फूल आय। बसंत ऋतु में खिलइया एकर सुग्घर नारंगी फूल न केवल कुदरती सुंदरता बढ़ाथें, बल्कि दवाई बनाए, होली के कुदरती रंग अउ चाम के देख-रेख में घलो काम आथें। छत्तीसगढ़ के कटघोरा वन मण्डल में परसा के रुख-राई बहुते जादा संख्या में मिलथे। पसान, केन्दई, जटगा, एतमानगर, कटघोरा, चौतमा अउ पाली जइसन इलाका में एहा भरपूर हे। इहां के आदिवासी अउ वनवासी परिवार बर ‘लघु वनोपज’ बटोरना रोजी-रोटी के मुख्य साधन आय। परसा फूल ला जादा करके मार्च-अप्रैल के महीना में बटोरे जाथे। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ, रायपुर डाहर ले बछर 2025 में एकर खरीदी दर 11.50 रूपिया प्रति किलो तय करे गे रहीस। ए दर ह बटोरइया ला ओकर मेहनत के सही मोल दिलाए में मददगार साबित होईस हे।

कटघोरा वनमण्डल में परसा फूल के संग्रहण लगातार बढ़त हे

बछर 2022-23 में 116 संग्राहक ले 402 क्विंटल, बछर 2023-24 में 40 संग्राहक ले 58 क्विंटल, बछर 2024-25 में 107 संग्राहक ले 147 क्विंटल अउ बछर 2025-26 में 20 संग्राहक ले 76 क्विंटल के संग्रहण करे गिस। एकर साथे-साथ परसा के कीमत में घलो बढ़ोत्तरी होईस हे। बछर 2022-23 में 900 रूपिया प्रति क्विंटल मिले वाला परसा, बछर 2024-25 में बढ़के 1150 रूपिया प्रति क्विंटल हो गे। एकर बाद संघ मुख्यालय डाहर ले एला 1600 रूपिया प्रति क्विंटल के दर ले बेंचे गिस, जेकर ले बटोरइया ला बढ़िया फायदा मिलिस।

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