रायपुर. कोरबा जिला के एकदम दुर्गम अउ जंगली इलाका लेमरू मा स्वास्थ्य सेवा के एक नवा अध्याय सुरु होय हे। जिला मुख्यालय ले लगभग 80-90 किलोमीटर दूर बसे ये इलाका पहाड़-पर्वत अउ जंगल ले घिरे हे, जिहाँ पहाड़ी कोरवा अउ बिरहोर जइसन पिछड़ी जनजाति रहिथें। पहिली इहाँ स्वास्थ्य सुविधा के भारी कमी रहिस, कोनो आपात स्थिति मा मरीज ला अस्पताल पहुँचाय मा 5 ले 6 घंटा लग जाय, जेकर से कतको बेर मरीज के जान ऊपर बन आय।
प्रशासन ह ये चुनौती ला देखत हुए लेमरू क्षेत्र मा संजीवनी एक्सप्रेस 108 एम्बुलेंस सेवा सुरु करे हे। कलेक्टर कुणाल दुदावत के कोशिश ले सुरु होय ये सेवा अब वनांचल बर ‘जीवनदायिनी’ साबित होवत हे। आधुनिक मशीन ले लैस ये एम्बुलेंस अब एक फोन कॉल मा गाँव-गाँव पहुँचत हे अउ मरीज मन ला तुरत इलाज देवत हे।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ह बताइन कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेमरू के तहत आवे वाला लगभग 20 गाँव के 16 हजार ले जादा मनखे मन ला एकर सीधा फायदा मिलत हे। रापा, बड़गांव, छातीबहार, लामपहाड़, डोकरमना, विमलता अउ देवपहरी जइसन दूर-दराज के गाँव अब ये सेवा ले जुड़ गे हें।
संजीवनी 108 एम्बुलेंस सिरिफ़ गाड़ी नोहे, बल्कि एक चल्त-फिरत अस्पताल आय। एकर भीतर स्ट्रेचर, व्हीलचेयर, ऑक्सीजन सिलिंडर, बीपी-शुगर जाँच के मशीन, डिलीवरी किट अउ जरूरी दवाई के पूरा इंतजाम हे। गंभीर मरीज मन बर वेंटिलेटर घलो हे अउ संगे-संग सधाय (प्रशिक्षित) ईएमटी स्टाफ हर बखत सेवा बर तैयार रहिथें।
पाछू एक बछर मा ये सेवा ले लगभग 1200 मरीज मन ला समे मा इलाज मिल चुके हे। हार्ट अटैक, एक्सीडेंट, सांप के काटे अउ जचकी (प्रसव) जइसन मामला मा ये सेवा ह कतको के जान बचाय हे। पहिली जिहाँ मरीज ला खटिया मा लाद के ले जाय बर पड़य, अब एम्बुलेंस के सायरन सुन के ग्रामीण मन रद्दा छोड़ देथें, काबर कि ओमन ला भरोसा हे कि ये जान बचाय बर आय हे।
कोरबा जिला ला हाल मा 12 नवा संजीवनी 108 एम्बुलेंस मिलीस हे, जेमा ले एक ला खास करके लेमरू बर रखे गे हे। लेमरू के गरीब आदिवासी परिवार मन बर ये योजना कोनो वरदान ले कम नोहे, काबर कि दुर्गम रद्दा मा प्राइवेट गाड़ी करना ओकर मन बर भारी महँगा पड़य। अब सरकारी एम्बुलेंस ले बिना कोनो खरचा के तुरत इलाज मिलत हे। लेमरू के मनखे मन के कहना हे कि अब इलाज समे मा मिलत हे, जेकर से सरकार ऊपर ओकर मन के बिसवास अउ बढ़ गे हे।
