ईंटा ल बढ़िया ले जोड़व… मसाला ल नीक ढंग ले डारव” – जब मजदूर बहनी ह मुख्यमंत्री ल सिखाइस काम
रायपुर . सुशासन तिहार के तहत पूरा प्रदेश में चलत औचक निरीक्षण अउ जनसंवाद के कड़ी में, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ह कबीरधाम जिला के ग्राम लोखान में एक अइसन अनुभव साझा करिन, जे ह सुशासन के मतलब ल अउ जादा जीवंत बना दीस।
बनत पंचायत भवन के निरीक्षण के बेरा में मुख्यमंत्री ह खाली कागजी काम ल देख के नहीं हट गे, बल्कि ओमन ओ काम के हिस्सा बनना पसंद करिन जे ह आम मनखे के जिंदगी ले सीधे जुड़े हे। ओमन के ए व्यवहार ह साफ कर दीस कि सुशासन खाली नीति अउ कागज तक सीमित नहीं हे, बल्कि जमीन में उतर के ओला महसूस करे अउ जिये के नाम आय।
निरीक्षण के बेरा में मुख्यमंत्री श्री साय ह ‘रानी मिस्त्री’ के रूप में काम करत मजदूर बहनी मन के बीच पहुँचीन अउ कुछ समय तक ओमन के साथ मिलके ईंटा जोड़ाई में हाथ बँटाइन।
ए बीच, मजदूर बहनी संगीता ह पूरे आत्मीय अधिकार अउ सहजता के साथ मुसकुरावत मुख्यमंत्री ल कहिस— “ईंटा जोड़ाई ल बढ़िया ले करव, मसाला ल नीक ढंग ले डारव।” ए गोठ ह खाली एक वाक्य नहीं रिहिस, बल्कि ओ भरोसा के प्रतीक रिहिस जे ह आज सरकार अउ जनता के बीच बन चुके हे। ए अइसन स्थिति आय जहाँ एक साधारण नागरिक घलो बिना कोनो डर-झिझक के अपन बात रखथे अउ मुख्यमंत्री ह ओला ओतके सहजता ले स्वीकार करथें।
मुख्यमंत्री ह कहिन कि:”सुशासन के असली मतलब खाली योजना बनाना नो हय, बल्कि ओला जनता के साथ मिलके जमीन में पूरा करना आय। जब सरकार अउ जनता के बीच गोठ-बात, भरोसा अउ साथ के रिश्ता बनथे, तब विकास ह सही मायने में स्थायी होथे।”ओमन के मुताबिक, ए आत्मीयता अउ साझेदारी ही सुशासन के सबले बड़े ताकत आय। ए बेरा में ओमन अधिकारी मन ल कड़ा निर्देश दीन कि:
- निर्माण के काम में क्वालिटी ले कोनो समझौता नहीं होना चाहिये।
- काम ह समय में पूरा होना चाहिये।
- मजदूर मन बर पिये के पानी, सुरक्षा अउ दूसर जरूरी सुविधा मन के इंतजाम होना चाहिये।
सुशासन तिहार ह एक बार फिर ए साबित कर दीस कि छत्तीसगढ़ में सरकार खाली दफ्तर तक सीमित नहीं हे, बल्कि ए ह संवेदनशीलता, साथ अउ भरोसा ऊपर टिके एक जीवंत व्यवस्था बन चुके हे। इहाँ सरकार अउ जनता के बीच कोनो दूरी नहीं हे, बल्कि सहयोग अउ साझेदारी के संबंध हे—अउ यही संबंध ह प्रदेश के विकास के सबले बड़े शक्ति बनके उभरत हे।
