धनंजय राठौर, संयुक्त संचालक अशोक कुमार चन्द्रवंशी, सहायक जनसंपर्क अधिकारी
‘मन की बात’ ले राष्ट्रीय पहिचान तक के सफर- जम्मो प्रकृति प्रेमी के मानना हे कि प्रकृति ह कभू अपन करजा नई भूलय। अगर मनखे ह पूरा ईमानदारी ले ओकर बचाव डहर एक कदम बढ़ाथे, त प्रकृति ह ओला अपन सुग्घर रूप म कतको गुना वापस करथे। छत्तीसगढ़ के ए पावन धरती, जे ह सदियों ले अपन सघन जंगल अउ सुग्घर संपदा बर जानबा हे, आज वन्यजीव संरक्षण के एक नवा उज्जर जुग डहर बढ़त हे।
छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिला म बसे बारनवापारा वन्यजीव अभ्यारण्य (लगभग 245 वर्ग किमी) म करिया हिरन मन के सफलतापूर्वक पुनर्वास होय हे, जहाँ अब ओकर संख्या 200 के करीब पहुँच गे हे। 1970 के दशक म विलुप्त हो चुके ए हिरन मन ल 2018 के पुनरुद्धार योजना अउ 2026 तक के वैज्ञानिक कोसिस ले वापस लाए गिस। हाल ही म देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ह जब अपन लोकप्रिय कार्यक्रम “मन की बात” म बारनवापारा अभ्यारण्य के करिया हिरन मन के सफल वापसी के गोठ कहिन, त ए ह केवल एक राज्य के उपलब्धि नई रिहिस, भलकुन भारत के पर्यावरण नक्शा म वन्यजीव संरक्षण के एक नवा अध्याय बन गे।
विजन भरा नेतृत्व अउ संकल्प- ए गौरवमयी उपलब्धि के सूत्रधार छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय हें। ओमन ए सफलता ल राज्य के समृद्ध जैव विविधता अउ पर्यावरण के प्रति सरकार के अटूट संकल्प के फल बताइन हे। मुख्यमंत्री श्री साय के मानना हे कि प्रधानमंत्री के सराहना ह केवल एक प्रशंसा नई ए, भलकुन छत्तीसगढ़ के वन विभाग अउ ओकर स्थानीय समाज के कठिन मेहनत म लगे राष्ट्रीय मुहर ए। मुख्यमंत्री के अगुवाई म छत्तीसगढ़ ह आज विकास अउ पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के बीच ओ दुर्लभ संतुलन ल साधत हे, जेकर आज पूरा दुनिया ल जरूरत हे।
वैज्ञानिक रणनीति: विलुप्ति ले पुनर्वास तक- बारनवापारा अभ्यारण्य म करिया हिरन मन के दिखना एक समय कम हो गे रिहिस। फेर वन मंत्री केदार कश्यप के बने मार्गदर्शन अउ प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) अरुण कुमार पाण्डेय के रणनीतिक निर्देशन ह ए असंभव लक्छ ल सच म बदल दीस। फरवरी 2026 के महीना छत्तीसगढ़ के वन इतिहास म एक मील के पत्थर बन गिस, जब बिसेसज्ञ के देखरेख म 30 करिया हिरन मन ल ओकर प्राकृतिक घर म ‘सॉफ्ट रिलीज’ तरीका ले छोड़े गिस। ए काम ह केवल ओमन ल जंगल म छोड़ना भर नई रिहिस, भलकुन ए पक्का करना रिहिस कि ओमन नवा माहौल म बिना कोनो तनाव के रह सकें। ब्लैकबक कंजर्वेशन सेंटर म बने खान-पान अउ वैज्ञानिक देखरेख ले ओकर संख्या म बढ़ोत्तरी होय हे।
प्रशासनिक इच्छाशक्ति अउ मैदानी संघर्ष- ए महाअभियान के पीछे ओ जांबाज अधिकारी अउ मैदानी अमला के मेहनत हे, जेमन दिन-रात एक कर दीन। मुख्य वन संरक्षक (रायपुर) सतोविशा समाजदार अउ वनमंडलाधिकारी (बलौदाबाजार) धम्मशील गणवीर के अगुवाई म फील्ड स्टाफ, जीव वैज्ञानिक अउ पशु चिकित्सक के एक समर्पित टीम ह ढाल बनके काम करिस। अभी ए हिरन मन के सुरक्षा बर हाई-टेक निगरानी प्रणाली, जीपीएस ट्रैकिंग अउ नियमित पेट्रोलिंग के परयोग करे जात हे, जो छत्तीसगढ़ वन विभाग के तकनीकी मजबूती के परमान ए।
रामपुर ग्रासलैंड: एक सुरक्षित भविस्स के पालना- बारनवापारा अभ्यारण्य के ए मॉडल ह आज देश के दूसर राज्य मन बर एक ‘केस स्टडी’ बन सकथे। यहाँ केवल करिया हिरन के प्रजाति के पुनर्वास नई होय हे, भलकुन ओखर बर एक पूरा आवास तंत्र विकसित करे गे हे। रामपुर ग्रासलैंड के वैज्ञानिक प्रबंधन, प्राकृतिक जल स्रोत के जीर्णोद्धार अउ घास के स्थानीय प्रजाति के संवर्धन ओ मुख्य कारण ए, जेमन करिया हिरन मन ल वहाँ फले-फूले बर प्रेरित करिन। एकर संग ही, स्थानीय समाज के सक्रिय भागीदारी ह मनखे अउ वन्यजीव के एक संग रहे के एक अनूठा मिसाल पेश करे हे। करिया हिरन (ब्लैकबक) भारतीय उपमहाद्वीप म पाए जाय वाला एक संकटग्रस्त मृग ए। नर करिया हिरन के रंग गहिर भूरा ले करिया होथे, ओकर लंबा सर्पिलाकार सींग होथे अउ शरीर के निचला भाग सफेद होथे। मादा करिया हिरन ह हल्का भूरा रंग के होथे अउ ओकर सींग नई होवय। ए प्रजाति ह खुला घास के मैदान म पाए जाथे अउ दिन के बखत सक्रिय रहिथे। एकर मुख्य आहार घास अउ छोटे पौधा ए। ओकर ऊंचाई लगभग 74 ले 84 सेंटीमीटर तक होथे। नर के वजन 20 ले 57 किलोग्राम के बीच अउ मादा मन के 20 ले 33 किलोग्राम तक होथे। नर करिया हिरन के सर्पिलाकार सींग, जो लगभग 75 सेंटीमीटर तक लंबा हो सकथे, ओला आसानी ले चिन्हांकित करथे।
भविस्स के राह अउ राष्ट्रीय संदेस- बारनवापारा अभ्यारण्य म गूँजत करिया हिरन मन के चहल-कदमी अउ ओकर कुलाचें ए बात के परमान ए कि अगर मनखे ह प्रकृति बर अपन जिम्मेदारी समझ लेवय, त खोए हुए धरोहर ल फिर ले वापस लाए जा सकथे। ए पहल ह आऊ भैया पीढ़ी बर एक ‘लिविंग लैबोरेटरी’ (जीवंत प्रयोगशाला) के रूप म काम करही, जहाँ ओमन प्रकृति के संग तालमेल बिठाना सीख सकहीं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मानना हे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ ह हमर नवाचार ल एक वैश्विक मंच प्रदान करे हे। छत्तीसगढ़ सरकार ह पर्यावरण संवर्धन अउ ग्रामीण अर्थव्यवस्था ल जोड़के एक अइसन भविस्स के निर्माण करत हे, जहाँ मनखे अउ वन्यजीव दोनों सुरक्षित रहंय। आज जब हम बारनवापारा अभ्यारण्य के खुला वादी म कुलाचें भरत करिया हिरन मन ल देखथन, त अइसन लागथे कि प्रकृति ह खुद मुसकुरावत छत्तीसगढ़ के ए सराहनीय कोसिस ल अपन आसिर्वाद देवत हे। ए छत्तीसगढ़ के गौरव के ओ उज्जर रूप ए, जेकर चमक अब पूरा देश ल प्रेरित करत हे।
