टूटत परिवार ला जोड़े के नवा तरीका
रायपुर. तेजी ले बदलत समाज म रिश्ता के उलझन घलो नवा चुनौती लेके आगू आवत हे। अक्सर घर के चार दिवार के भीतर जउन पीरा पनपथे—चाहे ओहा कऊनो सियान (बुजुर्ग) के उपेक्षा होवय या कऊनो मनखे के मानसिक तनाव—ओहा अनसुनी रह जाथे। फेर छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिला ह ए खामोशी ला अवाज दे के एक नवा रस्ता देखाइस हे।
दुर्ग जिला म सुरू होय जेंडर-बैलेंस्ड काउंसलिंग (Gender-Balanced Counseling) ब्यवस्था ह आज पारिवारिक बिवाद ला सुलझाय के एक अइसन समावेशी मॉडल बन के उभरे हे, जेखर गूंज अब राष्ट्रीय स्तर तक सुणाय देवत हे।
सेक्टर-6 म बने महिला थाना के परिवार परामर्श केंद्र, जेहा पहिली सिरिफ मनखे मन के सिकायत तक सीमित रहिस, ओहा अब एक बड़े सामाजिक मंच बन गे हे। इहां माई लोगन मन के संग-संग पुरुष अउ सियान मन के समस्या ला घलो ओतके गंभीरता अउ संवेदनशीलता ले सुने जावत हे।
उच्च न्यायालय के निर्देश के हिसाब ले सुरू होय ए केंद्र ह बखत के संग अपन दायरा ला बढ़ा लीस। बदलत पारिवारिक समीकरण अउ बिवाद के नवा रूप ला देखत हुए इहां जेंडर-बैलेंस्ड काउंसलिंग ला लागू करे गिस, जेखर ले हर पक्ष ला बिना कऊनो भेदभाव के अउ संतुलित सुनवाई के मौका मिल सकय।
ए पहल के सबले जरूरी कड़ी हे—पुरुष काउंसलर के नियुक्ति। पिछले कुछ बछर म ए बात साफ होइस कि पुरुष मन घलो मानसिक, आर्थिक अउ बिहाव के तनाव ले जूझत परामर्श केंद्र तक पहुंचत हें। अइसन म ओखर बात ला समझे अउ एक संतुलित सोच बनाय रखे बर ए कदम ह बड़ असरदार साबित होवत हे।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ह ए पहल ला समय के मांग बताइन अउ कहिन कि काउंसलिंग ले बिवाद ला सुरूआत म ही सुलझाय जा सकथे, जेखर ले परिवार म मेल-मिलाप अउ समाज म मजबूती आथे।
ओहे डाहर दुर्ग के एसएसपी विजय अग्रवाल के कहना हे कि गोठ-बात अउ सलाह (परामर्श) के तरीका ह पति-पत्नी के बीच के झगड़ा ला बड़े रूप लेय ले पहिली रोके म बड़ काम आवत हे। ए मॉडल ह न केवल बिवाद ला कम करत हे, बल्कि परिवार ला टूटे ले घलो बचावत हे।
ए ब्यवस्था के एक अऊ बड़े उपलब्धि हे—‘सीनियर सिटीज़न सपोर्ट बेंच’ के बनाना। ए खास इकाई म रिटायर अधिकारी, मनोवैज्ञानिक अउ समाजसेवी सामिल हें, जउन मन सियान मन के मामला ला बड़ धीरज अउ मया ले सुनथें।
इहां जउन सिकायत आथें, ओहा समाज के एक गहीर पीरा ला देखाथें:
- बेटा-बहू डाहर ले दुख देना।
- संपत्ति (जमीन-जगा) बर दबाव बनाना।
- जबरदस्ती वृद्धाश्रम भेज देना।
- दारू बर पइसा नई देय मां मारपीट करना।
- खाना-पीना बर तरसाना अउ घर ले निकाल देना। अइसन घटना मन अब खुल के आगू आवत हें।
अब तक ए केंद्र मां लगभग 200 सिकायत दर्ज करे गे हे, जेमां ले करीब 130 मामला के बढ़िया ढंग ले निपटारा करे जा चुके हे। ए आंकड़ा ह बताथे कि अगर सही बखत म गोठ-बात अउ मदद मिलय, त ओहा कतका असरदार हो सकथे।
दुर्ग के ए ‘काउंसलिंग-फर्स्ट’ मॉडल ह छत्तीसगढ़ म अपन किसम के पहिली पहल आय, जेहा परिवार के झगड़ा सुलझाय बर नवा रस्ता देखाय हे। जहां कतको राज्य म अभी घलो जुन्ना अउ एकतरफा तरीका चलत हे, ओहे दुर्ग ह माई लोगन, पुरुष अउ सियान मन—सबो ला एक मंच म बरोबर सुने के संतुलित मॉडल तइयार करे हे।
गोठ-बात ऊपर टिके ए ब्यवस्था ह न केवल झगड़ा ला सुलझवत हे, बल्कि घर-परिवार ला बिखरय ले घलो बचावत हे। एखरे सेती ए पहल ह अब देस भर म एक बड़े मिसाल बन के उभरत हे, जेला अब आने राज्य घलो अपनाय के सोचत हें।
