7 हजार के करजा ले सुरू होइस बदलाव के सफर
रायपुर. बस्तर जिला के कलचा गाँव के रहइया तुलसा बघेल आज गाँव के मजबूती (ससक्तीकरण) के एक नवा कहानी लिखत हे। कभू जुन्ना तरीका ले खेती अउ साधन के कमी में गुजारा करइया तुलसा ह तकनीक ला अपना के न केवल अपन किसमत ला बदल दीस, बल्कि अपन आधा एकड़ जमीन ला घलो कमाई के मुख्य जरिया बना दीस। ओखर जिनगी में बदलाव के ए कहानी साल 2020 में स्व-सहायता समूह ले जुड़े के संग सुरू होइस, जहाँ ले ओ ह आत्मविश्वास अउ तकनीक के पहिली सबक सीखिस।
सुरू के दिन में जानकारी के कमी अउ पानी के सुबिधा नई होय के सेती तुलसा ह सिरिफ पानी-बरसात के भरोसा में खेती कर पावत रहिस, फेर समूह ले जुड़े के बाद ओ ह सबले पहिली सिरिफ 7 हजार रूपिया के छोटा करजा लेके बाड़ी विकास कोती अपन कदम बढ़ाइस। खेती के जानकार के सलाह ले ओ ह मचान विधि अउ लाइन कतार पद्धति जइसन नवा तरीका मन ला अपनाइस। जैसे-जैसे कमाई बढ़त गिस, ओ ह खेती ला अउ बाढ़ाए बर बैंक ले 60 हजार रूपिया के करजा लीस अउ अपन खेत में बोरवेल खनाइस। ए एक कदम ह ओखर खेती के पूरा तस्वीर ला बदल दीस, काबर कि अब ओ ह साल भर फसल उगाए बर काबिल हो गे हे।
अभी के बखत में तुलसा बघेल ह साग-भाजी उगाय ला अपन मुख्य धंधा बना लीस हे, जेमा ओ ह पत्ता गोभी, मटर अउ भिंडी के सुग्घर फसल लीस हे। अब ओ ह आवे वाला खरीफ सीजन बर भिंडी, तरोई अउ खीरा जइसन फसल के तैयारी में जुट गे हे। खेती ले मिले मुनाफा के उपयोग ओ ह बहुत समझदारी ले करिस। ओ ह अपन कच्चे घर ला पक्के मकान में बदल लीस हे अउ अपन बेटी के बिहाव के तैयारी घलो करत हे।
अपन मिहनत ले आत्मनिर्भरता कोती बढ़े तुलसा अब सिरिफ खेती तक ही सीमित रहे नई चाहय। आगू के योजना ला लेके ओ ह बताथे कि ओ ह जल्दी ही कुकरी पालन (मुर्गी पालन) के काम सुरू करे जावत हे, ताकि कमाई के जरिया अउ बढ़ सके। एक साधारण मजदूर ले सफल किसान बने के ओखर ए सफर ह बस्तर के गाँव मन में सरकारी योजना अउ तकनीकी मदद के सुग्घर असर ला साफ देखाथे।
