पोंड लाइनर तकनीक ले बढ़िस पैदावार
रायपुर . प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के बने संचालन ले कोण्डागाँव जिला मा मछली पालन के क्षेत्र मा चहुँओर विकास ला बढ़ावा मिले जात हे। ए योजना के मतलब हे कि जल संसाधन के सही उपयोग करके मछुआरा अउ मछली पालन करइया के आय ला बढ़ाना। योजना के तहत जमीन अउ पानी के बने उपयोग करके मछली के उत्पादन अउ उत्पादकता बढ़ाय मा खास जोर दे जात हे। संगे-संग मछली मन ला बेंचे बर बने बाजार देवइ के कोसिस घलो करे जात हे।
मत्स्य संपदा योजना के लाभ उठाके जिला के ग्राम सातगाँव के गंगाधर नेताम ह आधुनिक तकनीक ले मछली पालन करके अपन एक अलग पहिचान बनात हे। ओमन प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत ‘पोंड लाइनर’ तकनीक ले तालाब बनवाईन। एमा कुल 14 लाख रुपिया के खरचा आइस, जेमा ओला सरकार डहर ले 8 लाख रुपिया के अनुदान (मदद) मिलिस। ए तकनीक के मदद ले ओ ह कम जगह मा घलो जादा उत्पादन करके बने पइसा कमात हे।
गंगाधर ह बताइस कि साल के दू सीजन मा लगभग 35 क्विंटल तक मछली के पैदावार होथे, जेखर ले ओला साल भर मा लगभग 3 ले 4 लाख रुपिया तक के आय मिलत हे। ओमन बताइन कि विभाग डहर ले योजना के लाभ के संगे-संग अधिकारी ले लगातार तकनीकी जानकारी अउ मार्गदर्शन घलो मिलिस, जेखर ले ओला मछली पालन के काम ला आगू बढ़ाय मा बड़ मदद मिलिस। गंगाधर के सहीं अउ कतको किसान मन ए योजना ले जुड़के मछली पालन के क्षेत्र मा बड़े सफलता पावत हें अउ आर्थिक रूप ले मजबूत बनत हें।
पोंड लाइनर तकनीक ले कम जगह मा जादा पैदावार
पोंड लाइनर तकनीक एक आधुनिक तरीका आय, जेमा तालाब या डबरी के तरी अउ ओखर कोरा (किनारों) मा एक खास किसम के प्लास्टिक सीट बिछाय जाथे। एखर मुख्य काम पानी के रिसाव (सोखना) ला रोकना अउ पानी ला बचाके रखना आय। ए तकनीक ह मछली पालन, खेती-किसानी अउ बारिस के पानी ला सहेजे बर बड़ काम के साबित होवत हे। लाइनर डाले ले पानी के रिसाव ह पूरा रुक जाथे, जेखर ले कम पानी मा घलो जादा दिन तक काम चल सकथे। मछली पालन मा पानी एक जगह थिर (स्थिर) रहिथे त मछली मन जल्दी बाढ़थें अउ पैदावार ह घलो बढ़ जाथे। एखर ले बार-बार पानी भरे के जरूरत नहीं पड़े, जेखर ले लागत कम होथे अउ मुनाफा बढ़ जाथे।
