रायपुर. पंडित जवाहर लाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय अउ डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय म स्थित मल्टी डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट (MRU) के वैज्ञानिक मन कोति ले बनाय गे सिकल सेल डायग्नोस्टिक किट ला राष्ट्रीय स्तर म बड़े पहिचान मिले हे। ए नवा कोसिस ला इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) डाहर ले आयोजित प्रतिष्ठित “इनोवेटर्स टू इंडस्ट्री कनेक्ट” समिट म प्रदर्शन बर चुने गे हे। ए समिट ह 23 अप्रैल 2026 ला भारत मंडपम, नई दिल्ली म होही, जिहाँ देस भर के बड़े बायोमेडिकल इनोवेटर्स अउ उद्योग जगत के दिग्गज मन सामिल होहीं।
ए सिकल सेल डायग्नोस्टिक किट के खोज MRU के वैज्ञानिक डॉ. जगन्नाथ पाल, डॉ. योगिता राजपूत अउ ओमन के टीम ह करे हे। ए किट के रिसर्च म MRU के नोडल ऑफिसर डॉ. मंजुला बेक के बिसेस सहयोग रहीस। ए किट ला खास करके नवा जनमे लइका मन म सिकल सेल एनीमिया के तुरत जाँच अउ माइ-लोगन मन के गर्भावस्था के बखत जाँच ला ध्यान म रख के बनाय गे हे।
आईसीएमआर (ICMR) के “मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र” कार्यक्रम के तहत देस भर ले चुने गे शीर्ष 10 तकनीक म ए किट ला जगह मिले हे। ए सूची म आईआईटी गुवाहाटी, एम्स नई दिल्ली अउ टाटा मेमोरियल सेंटर जइसन नामी संस्थान मन घलो सामिल हें। अइसन म ए कामयाबी ला मेडिकल कॉलेज अउ छत्तीसगढ़ राज बर एक बड़े गौरव के बात माने जावत हे।
ए नवा खोज बर 6 फरवरी 2026 ला इंडियन पेटेंट बर अर्जी (आवेदन) घलो पहिली ले दे दियें गे हे। बता दन कि ए परियोजना ला आईसीएमआर (ICMR) के एक्स्ट्राम्यूरल फंड कोति ले स्पॉन्सर करे गे रहीस, जेकर ले रिसर्च म जरूरी मदद मिलीस। ए कामयाबी ह सिकल सेल जइसन गंभीर बीमारी के जल्दी अउ सही जाँच करे के दिसा म बहुत महत्वपूर्ण माने जावत हे।
आईसीएमआर (ICMR) के “मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र” पहल के तहत ए कार्यक्रम के आयोजन तकनीक ला देखाए अउ ओला बाजार तक पहुँचाए (टेक्नोलॉजी ट्रांसफर) ला बढ़ावा दे के उदेस ले करे जावत हे। एकर मुख्य लछ्य बायोमेडिकल नवाचार ला उद्योग ले जोड़ना, पेटेंट लाइसेंसिंग ला बढ़ावा देना अउ सरकारी-निजी भागीदारी (PPP) ला मजबूत बनाना हे।
ए कॉन्क्लेव म चुने गे तकनीक ला नवा मेडिकल टेक्नोलॉजी ला देखाए, इंडस्ट्री के बड़े नेता मन ले सीधा गोठ-बात करे अउ व्यापार के मउका खोजे के एक बड़े मंच मिली।
MRU, रायपुर के टीम ला ए किट ला देखाए बर सरकारी तौर म नेवता (आमंत्रण) दिये गे हे। ओ मन ला कार्यक्रम म सामिल होय बर पंजीयन, तकनीक के एक पन्ना के फ्लायर अउ “मेक इन इंडिया” ले जुड़े अंडरटेकिंग ला तय बखत म जमा करे के निरदेस दिये गे हे। संग ही, वैज्ञानिक मन ला अपन बनाय किट के साथ कार्यक्रम म मौजूद रहे बर कहे गे हे।
ए सफलता ऊपर डीन डॉ. विवेक चौधरी ह कहिन कि कॉलेज म रिसर्च अउ नवा खोज ला लगातर बढ़ावा दिये जावत हे, जेकर नीक नतीजा अब देस भर म दिखत हे। ए उपलब्धि ह प्रदेश के चिकित्सा छेतर बर गौरव के बात आय।
ओहेच कोति, अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ह कहिन कि ए नवा खोज ह राज के स्वास्थ्य सेवा मन ला नवा दिसा दिही अउ सिकल सेल जइसन बीमारी के सही बखत म जाँच करे म बड़ मदद मिली।
ए कामयाबी ह न केवल छत्तीसगढ़ बर गर्व के बिसय आय, बल्कि देस म बायोमेडिकल नवाचार ला नवा रद्दा देखाए वाली पहल के रूप म घलो देखे जावत हे।
