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जहाँ गिरे रिहिस माता सती के जेवनी कंधा: आदिशक्ति माँ महामाया के नगरी रतनपुर

Araitutari Editor By Araitutari Editor Published March 24, 2026
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न्यायधानी बिलासपुर ले 25 किलोमीटर दूरिहा म म बसे रतनपुर सहर आदिशक्ति माँ महामाया देवी के पबित्तर पौराणिक नगरी आय। रतनपुर के जुन्ना अउ गौरवशाली इतिहास रहे हे। मंदिर के मंडप नागर शैली म बने हे, जउन ह 16 ठन खम्भा (स्तंभ) मन म टिके हे। गर्भगृह म आदिशक्ति माँ महामाया के साढ़े तीन फीट ऊँचा पत्थर के भव्य मूरती बिराजे हे। नवरात्रि म माँ महामाया के दरसन करे बर लाखों भक्त मन इहाँ आथें अउ उंखर माँगे जम्मो मनकामना माई ह पूरा करथे।

भैरव बाबा के दरसन हे जरूरी
जउन घलो भक्त माता महामाया के दरसन करे बर रतनपुर आथें, ओमन सबले पहिली महामाया मंदिर ले थोरकिन दूरिहा म बिराजे भैरव बाबा के मंदिर म रुक के दरसन करथें। भैरव बाबा के ये मूरती बड़ जुन्ना हे अउ कहिथें कि एखर ऊँचाई दिन-ब-दिन बाढ़त जावत हे। मान्यता हे कि जब भगवान शिव ह देवी सती के मृत सरीर ला लेके तांडव करत ब्रह्मांड म भटकत रहिन, तब भगवान विष्‍णु ह उमन ला मोह ले मुक्ति देवाय बर सुदर्शन चक्र ले सती के सरीर के टुकड़ा कर दीन। माता के अंग जहाँ-जहाँ गिरे, उहीं शक्तिपीठ बन गे। इहाँ महामाया मंदिर म माता के जेवनी (दाहिना) कंधा गिरे रिहिस। माने जाथे कि नवरात्रि म इहाँ करे गे पूजा कभू खाली (निष्फल) नइ जाय।

तीन रूप म दरसन देथें महामाया देवी
रतनपुर म बिराजे माँ महामाया के महिमा बड़का निराली हे। महाकाली, महालक्ष्मी अउ महासरस्वती के रूप म इहाँ महामाया देवी अपन भक्त मन ला दरसन देथें। दुर्गा सप्तशती अउ देवी पुराण म महामाया के बारे म जउन कुछु लिखे हे, ठीक उही रूप के दरसन रतनपुर म होथे। मंदिर म सक्ति के तीनों रूप दिखथें, अउ ए जम्मो रूप ला मिला के ही ‘महामाया’ कहे जाथे।

खास हे रामटेकरी मंदिर
रतनपुर म महामाया मंदिर के तीर म ही पहाड़ के ऊपर भगवान राम, माता सीता अउ लछमण जी के मंदिर हे, जेला ‘रामटेकरी’ कहे जाथे। रामटेकरी ले पूरा रतनपुर सहर दिखथे अउ ए नजारा बड़का सुग्घर लगथे। इतिहास बताथे कि 1045 ईसवी म राजा रत्नदेव प्रथम ह ‘मणिपुर’ नाम के गाँव म एक ठन बड़ (वट वृक्ष) के खाल्हे रात म सुते रिहिन। अईसनहा आधा रात म जब राजा के आंखी खुलीस, त ओमन पेड़ के खाल्हे एक अलौकिक अंजोर दिखाई दिस। राजा ह चकित रहि गे उहाँ आदिशक्ति श्री महामाया देवी के सभा लगे रिहिस। बिहनिया ओमन अपन राजधानी ‘तुम्मान खोल’ लहुट गे अउ रतनपुर ला अपन नवा राजधानी बनाय के फैसला करिन। 1050 ईसवी म श्री महामाया देवी के भव्य मंदिर बनवाए गिस। कहिथें कि जउन ए मंदिर के चौखट म आईस, ओ ह कभू खाली हाथ नइ गिस। माता के ए धाम म कुंवारी नोनी मन ला सौभाग्य के प्राप्ति होथे।

रतनपुर के अउ कुछु ‘जुन्ना गोठ’ अउ रोचक जानकारी:
१. लखनी देवी मंदिर (एक मुठ्ठी चउंर के महिमा):
रतनपुर म महामाया मंदिर ले थोरकिन दूरिहा एक अउ पहाड़ी म लखनी देवी के मंदिर हे। जुन्ना मनखे मन बताथें कि ए मंदिर ला राजा रत्नदेव के प्रधानमंत्री ह बनवाए रिहिस। कहिथें कि ओ बखत म मंदिर बनाए बर पईसा के कमी हो गे रिहिस, तब राज के जम्मो मनखे मन ले ‘एक मुठ्ठी चउंर’ दान माँगे गे रिहिस। उही चउंर ला बेच के जउन पईसा आईस, ओखर ले ये सुघ्घर मंदिर तैयार होइस।

२. गढ़-किलवा अउ हाथी किला:
रतनपुर ह कभू कलचुरी राजा मन के राजधानी घलो रहत रिहिस। इहाँ के किला (बदलगढ़) म आज जुन्ना नक्कासी अउ कलाकारी देखे ला मिलथे। किला के ‘हाथी दरवाजा’ बड़का प्रसिद्ध हे। कहिथें कि किला के भीतर अइसनहा सुरंग घलो रिहिस, जउन ह सीधा महामाया मंदिर कोती निकलत रहिस।

३. खूंटाघाट बांध के तीर म बसे नगरी:
रतनपुर के प्राकृतिक सुघ्घरई ला बढ़ाए म ‘खूंटाघाट’ (खारंग जलाशय) के बड़का हाथ हे। मंदिर के दरसन करे के बाद मनखे मन इहाँ के सुघ्घर हरियाली अउ पानी ला देखे बर जरूर जाथें।

पोठ गोठ
रतनपुर सिरिफ एक सहर नोहे, भलकुन ये हमर छत्तीसगढ़ के इतिहास अउ आसा के पोठ केंद्र आय। राजा रत्नदेव ले लेके आज तक, माँ महामाया के किरपा इहाँ के माटी म रचे-बसे हे। अईसनहा पावन नगरी म माथा टेके ले मन ला जउन सांति मिलथे, ओ ह आने कहाँ!

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Araitutari Editor March 24, 2026
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